ज्येष्ठ गौरी पूजा – शुभ मुहूर्त (1 सितंबर 2025)
🌸 1 सितंबर 2025 (सोमवार) — ज्येष्ठ गौरी पूजा 🌸
📅 तिथि व वार
दिनांक : 1 सितंबर 2025
वार : सोमवार
मास : भाद्रपद शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि
🌺 ज्येष्ठ गौरी पूजा क्या है?
यह पर्व माता गौरी (पार्वती जी) की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
इसे विशेष रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक और दक्षिण भारत में बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है।
इस दिन महिलाएँ माता गौरी की प्रतिमा या कलश स्थापित करके उनकी पूजा करती हैं।
यह पूजा सुंदरता, सौभाग्य, संतान सुख और घर में समृद्धि की कामना से की जाती है।
✨ पूजा विधि
1. प्रातः स्नान कर के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2. घर के पूजा स्थान पर गौरी माता की प्रतिमा या कलश स्थापित करें।
3. कलश पर रोली, हल्दी, कुंकुम, पुष्प, अक्षत और वस्त्र अर्पित करें।
4. माता को सौंदर्य प्रसाधन (सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, काजल, मेहंदी) चढ़ाना शुभ माना जाता है।
5. दूध, दही, शहद और पंचामृत से स्नान कराएँ।
6. माँ को सजीव भोग अर्पित करें जैसे फल, मिठाई और विशेषकर पकवान (पुए, पूरी, हलवा)।
7. अंत में आरती और गौरी स्तुति करें।
🌷 व्रत का महत्व
यह व्रत विशेषकर सुहागिन महिलाएँ करती हैं।
इसे करने से विवाह योग्य कन्याओं को उत्तम वर की प्राप्ति होती है।
माँ गौरी की कृपा से घर में लक्ष्मी का वास, परिवार में सुख-शांति और संतान की दीर्घायु प्राप्त होती है।
सोमवार का दिन होने के कारण इस दिन भगवान शिव की पूजा का भी विशेष फल मिलता है।
🌟 विशेष योग
1 सितंबर 2025 को रवि योग भी बन रहा है, जो कि किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए अत्यंत मंगलकारी है।
इस योग में पूजा करने से कर्मफल शीघ्र मिलता है और जीवन में बाधाएँ दूर होती हैं।
👉 सारांश में — कल ज्येष्ठ गौरी पूजा है। इस दिन माँ गौरी और भगवान शिव की आराधना करने से घर-
परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और वैवाहिक जीवन में सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
Puja Muhurat (पूजा का शुभ समय):
सुबह 5:59 बजे से शाम 6:43 बजे तक — इस मुहूर्त में पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है .
कुछ अन्य स्रोतों में थोड़ा अंतर मिलता है:
सुबह 6:14 बजे से शाम 6:30 बजे तक — यह भी एक शुभ मुहूर्त के रूप में उल्लेखित है .
⏰ तुलनात्मक सारांश
स्रोत शुभ मुहूर्त अवधि (लगभग)
DrikPanchang / Rgyan 05:59 AM – 06:43 PM लगभग 12 घंटे 43 मिनट
Jagran (Daily Jagran) 06:14 AM – 06:30 PM लगभग 12 घंटे 16 मिनट
दोनों में से कोई भी चयनित मुहूर्त पूजा के लिए अत्यंत शुभ है। अगर आप विस्तृत अवधि में पूजा करना चाहती हैं, तो 05:59 AM – 06:43 PM मुहूर्त उपयुक्त रहेगा। जबकि यदि आपके पास थोड़ी सीमित अवधि है या आप मध्य समय में पूजा शुरू करना चाहें, तो 06:14 AM – 06:30 PM भी उपयुक्त रहेगा।
पूजा कार्यक्रम सुझाव
सुबह 5:59 बजे के आसपास हल्के पूजा-स्थान की तैयारी शुरू करें (साफ-सफाई, कलश/मूर्ति स्थापना, हाथों में हल्दी–कुंकुम, फूल, प्रसाद आदि तैयार रखें)।
पूजा का मुख्य आरंभ 06:14 बजे किया जा सकता है: इस समय से आरती, भोग और श्रद्धापूर्वक विदा तक सभी विधियाँ संपन्न की जा सकती हैं।
पूरे दिन — चाहे आप सुबह शुरू करें या मध्य समय से — पूजा विधियों का
पालन करते रहना अच्छा रहेगा।
🌸 ज्येष्ठ गौरी विसर्जन 2025 🌸
📅 तिथि : 2 सितंबर 2025, मंगलवार
🕉️ अवसर : भाद्रपद शुक्ल दशमी
महत्व
भाद्रपद शुक्ल नवमी को स्थापित की गई माँ गौरी की प्रतिमा या कलश का विसर्जन दशमी तिथि को किया जाता है। यह दिन माँ गौरी की पूजा का समापन है।
माँ गौरी, जो सौभाग्य, संतान सुख और गृह-समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं, उनकी कृपा से घर-परिवार में शांति, सुख और उन्नति बनी रहती है।
🌺 विसर्जन विधि
प्रातः स्नान कर के माता गौरी की प्रतिमा/कलश को फिर से सजाएँ।
उन्हें पुष्प, अक्षत, हल्दी-कुंकुम और मिठाई का भोग अर्पित करें।
परिवार सहित आरती करें और विसर्जन मंत्रों का उच्चारण करें।
अंत में प्रतिमा या कलश को नदी/तालाब या घर के ही किसी शुभ स्थान पर विसर्जित करें।
विसर्जन के समय माता से क्षमा प्रार्थना और आशीर्वाद की कामना करें।
🌷 आध्यात्मिक संदेश
माँ गौरी विसर्जन हमें यह शिक्षा देता है कि जीवन में हर शुभ कार्य का एक आरंभ और एक समापन होता है। देवी-पूजन से प्राप्त ऊर्जा, कृपा और सकारात्मकता को हमें अपने हृदय और आचरण में समाहित करना चाहिए।
🌼🙏 “हे माँ गौरी! हमारे जीवन में सौभाग्य, सुख
-शांति और समृद्धि का संचार करें।” 🙏🌼

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